
न्याय और धर्म
काश्मीरके हिंदू नरेश अपनी उदारता, विद्वत्ता और न्यायप्रियता के लिये बहुत प्रसिद्ध हुए हैं। उनमेंसे महाराज चन्द्रापीड उस समय गद्दीपर

काश्मीरके हिंदू नरेश अपनी उदारता, विद्वत्ता और न्यायप्रियता के लिये बहुत प्रसिद्ध हुए हैं। उनमेंसे महाराज चन्द्रापीड उस समय गद्दीपर

महात्मा नूहको दीर्घायु मिली थी ! पूरे एक हजार वर्षतक वे जीवित रहे, अन्तमें उनका शरीर छूटा और वे स्वर्ग

ईरान के शाह अब्बासको उनके एक पदाधिकारीने अपने यहाँ निमन्त्रण दिया था। निमन्त्रणमें पहुँचकर शाह तथा उनके परिकरोंने इतना मद्यपान

प्राचीन कालमें एक सियार और एक वानर मित्र भावसे एक ही स्थानपर रहते थे। दोनोंको अपने पूर्व जन्मका स्मरण था।

जिन दिनों महाराज युधिष्ठिरके अश्वमेध यज्ञका उपक्रम चल रहा था, उन्हीं दिनों रत्नपुराधीश्वर महाराज मयूरध्वजका भी अश्वमेधीय अश्व छूटा था,

मध्यकालीन भक्त संत कुम्भनदासका जीवन समग्ररूपसे श्रीकृष्णके चरणारविन्दमें समर्पित था। वे उच्चकोटिके त्यागी थे। व्रजके निकट जमुनावतो ग्राममें खेती कर

मुफ्त कुछ नहीं होता ‘जब कोई चीज मुफ्तमें मिल रही है तो समझ लीजिये, आपको अपनी स्वतन्त्रता देकर इसकी कीमत

इंगलैंडका चतुर्थ हेनरीका ज्येष्ठपुत्र, जो आगे हेनरी पञ्चम नामसे प्रसिद्ध हुआ, बड़ा ही शूरवीर और राजकाजमें भी अत्यन्त दक्ष था।

बंगालमें द्वारका नदीके तटपर तारापीठ एक प्रसिद्ध स्थान है। कुछ ही साल पहलेकी बात है, एक सज्जन तारादेवीका दर्शन करनेके

कनिष्ठाः पुत्रवत् पाल्या भ्रात्रा ज्येष्ठेन निर्मलाः । प्रगाथो निर्मलो भ्रातुः प्रागात् कण्वस्य पुत्रताम् ॥ (नीतिमञ्जरी 111) महर्षि धोरके पुत्र कण्व