भगवान जी तुम कहते हो मांग ले ये तन मन ये आत्मा में तुम्हारा निवास है। सब कुछ तुम ही तुम हो , मांगता तो वह है जो तुम से जुड़ा न हो। जब रोम रोम में तुम निवास करते हो तो सब कुछ तुम ही हो। मेरे प्रभु तुम मुझ में ऐसे ही समाये हुए प्रेम अमृत का रसपान कराते रहो। हे स्वामी हर क्षण सम्बन्ध बनाऐ रखना। भक्त भगवान् नाथ से मांगता नही है। भक्त कहता है कि हे परमात्मा जी मुझे तो बस पुकारना आता है और कुछ आता ही नहीं है। सब कुछु मेरे प्रभु जानते हैं। जय श्री राम
