अन्तर्मन का साथी

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जगत में किसी का कोई अन्तर्मन का साथी नहीं है। हम पृथ्वी पर अपना साथी ढुढने आये हैं। हम पुजा पाठ करेंगे तब हमारे विचारों में शुद्धता बनेगी और हम दृढ़ विस्वास से ओतप्रोत होगे। जब हमारे अन्दर पोजीटिव अनरजी बनने लगती है। तब कोई भी मुसीबत हमे तोड़ नहीं सकती। तकलीफे बङी नहीं होती हम अपने विचारों से बङी बना देते हैं। हम तकलीफ आते ही भगवान की शरण हो जाते भगवान को हर समय भजते हैं तब हम कहते हैं भगवान ही हमारे सहायक है हमे पुजा पाठ के माध्यम से एक ऐसा साथी मिल जाता है जो हमें दिखाई नहीं देता पर हर समय साथ रहता है और हमारे कदम आगे बढ़ते जाते हैं। हम जिस भी भगवान् की पुजा करे हमे यह मानना चाहिए कि ये मेरे स्वामी भगवान् नाथ है। भगवान हमारे जन्म जन्मानतर के साथी हैं जब साथी प्रभु प्राण नाथ है हमे चिंता किस बात की है।हमे चित से प्रभु प्राण नाथ का चिन्तन करना है। हम अपने भगवान के चरणो में अन्तर्मन से नतमस्तक रहे ।यही आत्मा की पुकार है
भजन गाने चाहिए जब हम गाते हैं तब तर्ज से गाते हैं। कभी लम्बी तर्ज से गाते हैं तो कभी पुरे जोर जोर से गाते हैं। इससे हमारे फेफड़ों को आक्सीजन मिलती है। हमारे अन्दर आनंद उल्लास समा जाता है।आन्नद और उल्लास ही जीवन है।



No one in the world has any inner partner. We have come to the earth to find our mate. If we do the worship, then our thoughts will become pure and we will be filled with strong faith. When positive energy starts forming in us. Then no trouble can break us. Troubles are not big, we make them bigger with our thoughts. We take refuge in God as soon as trouble comes, we worship God all the time, then we say that God is our helper, we get a partner through worship, who is not visible to us but stays with us all the time and takes our steps. keep moving forward. Whatever God we worship, we should believe that this is my lord Bhagwan Nath. God is our companion after birth, when the companion is Prabhu Pran Nath, what are we worried about. We have to think of Prabhu Pran Nath with our mind. Let us bow deeply at the feet of our Lord. This is the call of the soul. When we sing bhajans, we sing along the lines. Sometimes they sing with long lines and sometimes they sing loudly. This gives oxygen to our lungs. Joy and gaiety are absorbed in us. Joy and gaiety is life.

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