भगवान के भाव 3

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जो काम करते हुए भजन करते हैं। वे देखने वाले की दृष्टि में काम कर रहे हैं असल में वे परमात्मा के साथ खेलते हैं।भगवान का चिन्तन चल रहा है। कर्म इन्द्री और ज्ञान इन्द्री एक रूप धारण कर लेती है भाव की गहराई बन जाती है। रोटी बेल रहा प्रभु प्राण नाथ के प्रेम की उत्पत्ति होती है। कहता है कि हे मेरे स्वामी जैसे ये बेलन रोटी पर प्रेम से चल रहा है ऎसा ही तुम मेरे पास होते तो मैं तुम्हें ये प्रेम समर्पित कर देती। राम राम राम राम राम राम राम राम राम परमात्मा परमात्मा परमात्मा मेरे प्रभु प्राण प्यारे मुझे ये सब कुछ तुम ही लगते हों ।भाव में रोटी बन जाती है फिर कहता है कि हे प्रभु जी हे भगवान किसी दिन ऐसा भी होगा तुम मेरे सामने होंगे ।जय श्री राम राम राम जय श्री राम राम राम मेरे भगवान् मेरे नाथ दिल की धड़कन पुकारती है तुम चले आओ


भगवान् से हम जब सुबह शाम दोपहर लाखों बार बात करले हमारी हर किरया में परमतत्व परमात्मा का निवास हो हाथ हिलने मात्र से नाम ध्वनि निकलने लगे तब हमें शब्द रूप देना चाहिए। अन्यथा परम तत्व परमात्मा को हम हृदय में छुपा ले। क्योंकि स्वामी भगवान् नाथ बङी मुश्किल से भाव विभोर करते हैं। रोटी का भोजन पकाते हुए के बहुत भाव है क्योंकि भोजन पकाते हुए मुझे बार बार दिखता भगवान खङे है। हर ध्वनि नाम ध्वनि बन जाती श्री राम श्री राम श्री राम हृदय की पुकार बन जाती है श्री राम बाहर और भीतर गुंजता मै खो जाती मेरे प्रभु प्राण प्यारे के भाव में जय श्री राम अनीता गर्ग



Those who worship while working. They are working in the eyes of the beholder, in fact they are playing with God. Contemplation of God is going on. The sense of action and the sense of knowledge assume one form, the depth of the feeling becomes. The love of Prabhu Pran Nath, who is rolling the bread, originates. It says that O my lord, if you were with me like this cylinder is running on bread with love, I would have dedicate this love to you. Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Paramatma Paramatma Paramatma My Lord Pran Beloved I think all these things only you. Bread is made in the feeling and then it says that Lord, Lord, someday it will happen like this, you will be in front of me. Jai Shri Ram Ram Ram Jai Shri Ram Ram Ram My God My Nath The heartbeat calls, You come

When we talk to God millions of times in the morning and afternoon, the Supreme God resides in our every action, when the sound of the name starts coming out just by moving our hands, then we should give the form of words. Otherwise we should hide the Supreme Tattva Paramatma in our heart. Because Swami Bhagwan Nath gets emotional with great difficulty. There is a lot of feeling about cooking a meal of roti because while cooking food, I see God standing again and again. Every sound becomes a name sound Shri Ram Shri Ram Shri Ram becomes the call of the heart Shri Ram resonates outside and inside I get lost in the spirit of my Lord Prana Pyare Jai Shri Ram Anita Garg

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