मित्रता दिवस

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हमें मित्र बनाना हो तब भगवान को अपना सखा मित्र बनाओ। भगवान हमारे सच्चे साथी हैं जो कही बाहर नहीं अन्तर्मन मे बैठे हैं। मित्रता की बात करते तब सबसे पहले कृष्ण सुदामा का नाम लेते हैं। कृष्ण सुदामा की प्रेम और समर्पण भाव अद्भुत मित्रता है। सुदामा कृष्ण की मित्रता तो मानो फूल और भवरे की तरह हैं जो एक दूसरे पर ही मरते हैं। बिना किसी भेद भाव के बस अपने मित्र पर सब न्योछावर कर देना कृष्ण जैसे मित्र के द्वारा ही संभव हैं। कृष्ण जैसा मित्र पाकर तो सभी धन्य हो जाते हैं परंतु यहां स्थिति दूसरी थी कृष्ण सुदामा जैसे मित्र पाकर धन्य हो गए थे।

भगवान राम और निषाद की मित्रता।

भगवान राम और निषाद एक ऐसा उदाहरण हैं मित्रता का जो आज के युग में बहुत कम देखने को मिलता हैं।एक केवट अयोध्या के राजा राम का प्रिय सखा, इस उदाहरण से मानो मित्रता कितनी निश्च्छल और निर्मोही है मालूम चलता हैं।



If we want to make friends, then make God your best friend. God is our true companion who is sitting somewhere inside not outside. When talking of friendship, Krishna first takes the name of Sudama. The love and dedication of Krishna Sudama is a wonderful friendship. Sudama Krishna’s friendship is like a flower and a flower that die on each other. Without any discrimination, simply sacrificing everything on your friend is possible only through a friend like Krishna. Everyone becomes blessed by getting a friend like Krishna, but here the situation was different, Krishna was blessed to have a friend like Sudama.

Friendship of Lord Ram and Nishad. Lord Ram and Nishad are one such example of friendship which is rarely seen in today’s era. A boater, the dear friend of King Ram of Ayodhya, knows from this example how pure and unselfish friendship is. Let’s go

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