अनेकता में एकता

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ईश्वर एक है लेकिन पांचों ऊगली एक समान नहीं हैं किसी को मां दुर्गा मे ईश्वर दिखाई देते हैं तब किसी को राम जी मे कृष्ण जी मे दिखाई देते हैं तब किसी को गुरु में ईश्वर दिखाई देते है।

धर्म भिन्न हो सकते हैं। भारत वर्ष में अनेक जन जातियां हैं और अनेक धर्म में अनेक रूप में पुजा प्रार्थनाएँ की जाती है। अनेक धर्मों में पुजा का रूप भिन्न दिखाई देते हुए भी सब एक रूप है क्योंकि सबका भाव प्रभु प्राण नाथ के प्रति प्रेम भाव की दृढता को दर्शाता है। सभी धर्मों का लक्ष्य ईश्वर के चरणो में समर्पित भाव से है। परम पिता परमात्मा की वन्दना स्तुति नाम जप ध्यान धरते हुए चेतन तत्व को जाग्रत करना है।


स्त्री घर में ही अध्यात्म की खोज करती है उसे कंही बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है स्त्री के अन्दर जन्म से ही त्याग और समर्पण भाव छिपा होता है।
राम में जग समाया हुआ। राम प्रेम है राम भक्ति साधना हैं राम सत्य त्याग समर्पण हमें सिखाते हैं राम आत्माराम है राम आनंद का बहता हुआ झरना है रामनाम के झरने को स्पर्श करते हैं वो भव पार हो जाते हैं जय श्री राम

प्रभु से बात दिल की गहराई से की जाती है। आंखें आंसू तभी बहाती है। जब  परमात्मा से सम्बंध बन जाता है। आंखें खुली हो और आंखे बन्द हो उससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है। परम पिता परमात्मा भाव पर रिझ जाते हैं।  भगवान नाथ से उठते बैठते सोते जागते हुए बात करते हुए ध्याते रहे जय श्री राम अनीता गर्ग



God is one but all five fingers are not the same, some see God in Maa Durga, then some see God in Rama, then some see God in Guru.

Religions may differ. There are many tribes in India and worship prayers are performed in many forms in many religions. In many religions, the form of worship appears to be different, yet all are one form because everyone’s sentiment shows the firmness of love for Prabhu Pran Nath. The goal of all religions is to surrender at the feet of God. Worshiping the Supreme Father, the Supreme Soul, chanting the name, is to awaken the conscious element by meditating.

A woman searches for spirituality in the house itself, she does not need to go out anywhere, the spirit of sacrifice and surrender is hidden in the woman from birth itself. The world was absorbed in Ram. Ram is love, Ram is devotional practice, Ram is truth, sacrifice, dedication teaches us, Ram is Atmaram, Ram is a flowing spring of joy, touches the waterfall of Ramnaam, those souls cross Jai Shri Ram.

Talking to the Lord is done from the bottom of the heart. Then the eyes shed tears. When a relationship with God is formed. It doesn’t matter if the eyes are open and the eyes are closed. The Supreme Father gets attracted to the Supreme Soul. Waking up from Lord Nath while talking while sleeping, Jai Shri Ram Anita Garg kept meditating.

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