पुर्ण समर्पण

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अनन्तता शब्द आपने ज़रूर सुना होगा। इसका अर्थ है, अपने आराध्य देव के सिवा, किसी और से किंचित् भी अपेक्षा ना रखना। अपने उपास्य श्री राधावल्लभ के सिवा किसी से कुछ चाहना भी नहीं माँगना भी नहीं।

अपने आराध्य के चरणों में हमारा पुर्ण निष्ठा और पुर्ण समर्पण ही वास्तव में अनन्यता है। बस होना चाहिए एक भरोसा, एक बल, एक आस और एक विश्वास।

समय कैसा भी हो, सुख-दुख, सम्पति विपत्ति, जो भी हो खुद मे धैर्य रखना चाहिए। धर्म के साथ धैर्य ज़रूरी है। प्रभू पर भरोसा ही भजन है। अनन्यता का अर्थ है, अन्य की ओर ना ताकना।

श्री कृष्ण गीता में कहते हैं,जो भी मेरे प्रति अनन्य भाव से शरणागत हो चूके है, “ मै “श्री कृष्णा उनका योगक्षेम वहन करता हूँ, अर्थात् जो प्राप्त नहीं होता,वो मैं दे देता हूँ। अर्थात् जो प्राप्त होता उसकी रक्षा करता हूँ ।

अनन्यता का मतलब है, दुसरे देवो का उपेक्षा करना नहीं,अपितु उनसे अन्य कार्यों की अपेक्षा ना रखना है। जय जय श्री राधेवल्लभ श्री कृष्णा मुरारी जय हो।
जय श्री राधे कृष्णा



You must have heard the word infinity. It means not to expect anything from anyone other than your deity. Don’t even ask for anything from anyone except your worshiper Shri Radhavallabh.

Our complete devotion and complete dedication at the feet of our adoration is really the only uniqueness. There should be only one trust, one force, one hope and one faith.

Whatever be the time, happiness or sorrow, property and calamity, whatever may be, one should be patient with oneself. Patience is necessary with religion. Trust in the Lord is a hymn. Uniqueness means not looking at others.

Shri Krishna says in the Gita, “Whoever has surrendered to Me with an exclusive feeling, “I bear the Yogakshema of Shri Krishna, that is, I give what is not received. That is, I protect what I get.

Anonymity means not to ignore other gods, but not to expect other works from them. Jai Jai Shri Radhevallabh Shri Krishna Murari Jai Ho. Hail Radhe-Krishna

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