
परमात्मा क्या है, कौन है, कहां है ?
परमात्मा क्या है, कौन है, कहां है ?परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं। इसलिए न तो कहा जा सकता है कि कौन

परमात्मा क्या है, कौन है, कहां है ?परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं। इसलिए न तो कहा जा सकता है कि कौन

ये समय ऐसा है कि धर्म मे राजनीति का दौर चल रहा है और इस सम्पूर्ण भारत के लिए के

आज्ञा, मूलाधार चक्र और इड़ा पिंगला, सुषुम्ना नाडीआज्ञा चक्र शास्त्र में इसके कमल कि दो पंखुड़ी कहा गया है,सभी चक्र

भारतीय तत्त्व दर्शन में त्याग का स्थान बहुत महत्व का है। त्यागमय जीवन को ही यहां सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

मीरा का मार्ग था प्रेम का, पर कृष्ण और मीरा के बीच अंतर था पाच हजार साल का। फिर यह

पहले एक परमात्मा ही थे, वे ही परमात्मा संसार रूप से प्रकट हो गए एकोऽहं बहुस्याम् और अन्त में सब

मृत्यु का रहस्य जब सूक्ष्म शरीर देह से मुक्त होता है साँसें थमती हैं नाड़ियों में प्राण स्पंदन खोने लगते

अगर कोई भी यहां न हो, तो प्रकाश शून्य में गिरता रहेगा और कोई निकलेगा तो उस पर पड़ जाएगा।

मैं नहीं सोचता कि मैं उसे भलीभांति जानता हूं न ही मैं ऐसा सोचता हूं कि मैं उसे नहीं जानता

एक रात्रि की बात है, पूर्णिमा थी, मैं नदी तट पर था, अकेला आकाश को देखता था। दूरदूर तक सन्नाटा