
Prbhu ko dil me bitha
*एक सब्ज़ी वाला था, सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था ।”प्रभु” उसका तकिया कलाम था

*एक सब्ज़ी वाला था, सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था ।”प्रभु” उसका तकिया कलाम था

एक बार एक संत से किसी ने पूछा -कि वृद्ध व्यक्ति की सेवा करने का क्या महत्व है। संत ने

राम चरित्र मानस एक दिन संध्या के समय सरयू के तट पर तीनों भाइयों संग टहलते श्रीराम से महात्मा भरत

आज का प्रभु संकीर्तन।हे प्रभु! इस सृष्टि के आदि में भी तुम्हीं थे और सृष्टि का यदि किसी काल में

वृन्दाबन साँचौ धन भैया।कनक कूट कौटिक लगि तजिए, भजिये कुँवर कन्हैयाँ॥जहाँ श्री राधा चरनरेनु की कमला लेत बलैय्या।तिन को गोपी

जो भी साधक हर रोज उगते सूर्य के सामने बैठकर भगवान सूर्य की इस स्तुति का पाठ अर्थ सहित करता

भगवन्नाम लेना जबसे शुरू किया, समझना चाहिये कि तभी से जीवन की असली शुरुआत हुई है।भगवन्नाम में ऐसी अलौकिक शक्ति

हरि ॐ तत्सत, इस संसार में जिस जिस ने परमात्मा की खोज की। सबके परमात्मा की खोज के मार्ग अलग

श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं नवकंज लोचन, कंजमुख कर, कंज पद कंजारुणं। कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील

नमामि भक्त वत्सलं कृपालु शील कोमलम् भजामि ते पदाम्बुजम् अकामिनां स्वधामदं | निकाम श्याम सुंदरम भवाम्बुनाथ मन्दरम् प्रफुल्ल कंज लोचनं