
राधे को सांप ने काटा है
इक दिन जब मोहन नेराधा जी के कहने परदूध दुहा थाऔर राधा जी ने जाने काउपक्रम किया थातब मोहन ने

इक दिन जब मोहन नेराधा जी के कहने परदूध दुहा थाऔर राधा जी ने जाने काउपक्रम किया थातब मोहन ने

भक्ति भाव की बात है. मनुष्य का अस्तित्व तीन तलों में विभाजित है. शरीर बुद्धि ह्रदय दूसरी तरह से कहें,

कान्हा तेरी वंसी मन तरसाए | कण कण ज्ञान का अमृत बरसे, तन मन सरसाये | ज्योति दीप मन होय

प्रेम ही प्रभु का विधान है वा प्रेम ही भक्ति है। तुम जीते हो ताकि तुम प्रेम करना सीख लो।

नाचे कृष्ण मुरारी, आनंद रस बरसे रे | नाचे दुनिया सारी, आनंद रस बरसे रे || नटखट नटखट हैं नंदनागर,

तुम मुझे देखा करो और मैं तुम्हें देखा करूँ हमारा मन वहीं लगता है, जहाँ हमारी अभिलाषित वस्तु होती है,

सुखों का सागर, कलप वृक्ष, चिंतामणी, कामधेन गाय जिसके वश में हैं। चार पदारथ अठारह सिद्धियाँ नौ निधियाँ जिसकी हाथ

आते हो तुम बार-बार प्रभु ! मेरे मन-मन्दिरके द्वार।कहते—‘खोलो द्वार, मुझे तुम ले लो अंदर करके प्यार’॥मैं चुप रह जाता,

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है गृहस्थ जीवन में भी भक्त मेरी भक्ति कर सकता है। गृहस्थ में रहते हुए माता,

प्रेम की अगन हो,भक्ति सघन हो,मन में लगन हो तो,प्रभु मिल जाएंगे ॥हृदय में भाव हो,अनुनय की छांव हो॥आराधन का