
श्रृद्धा और समर्पण
🙏🙏 एक गाँव में एक साधू महाराज रहते थे । साधू महाराज जहाँ भी जाते, नाम जप पर उपदेश देते

🙏🙏 एक गाँव में एक साधू महाराज रहते थे । साधू महाराज जहाँ भी जाते, नाम जप पर उपदेश देते

उस छोटी सी आयु में ही वे न्यायासन पर बैठते तो बाल की खाल उतार देते।बैरी को मोहित कर लें

ईडरगढ़ से आपके जवाँई पधारे हैं, यह तो आपने सुन ही लिया होगा।अब आपके कारण मुझे कितने उलाहने, कितनी वक्रोक्तियाँ

वे पिता को अपनी निधि दिखाना चाहते थे, समझाना चाहते थे।वे चाहते थे कि जो उन्हें मिला, वह सबको मिले,

‘उसकी इच्छा के सामने सारे सिद्धांत और नियम धरे के धरे रह जाते हैं, थोथे हो जातें हैं।अत: केवल उसकी

ऋषि कश्यप की पत्नी अदिति से जन्मे पुत्रों को आदित्य कहा गया है। ये ही १२ आदित्य हैं- अंशुमान, अर्यमन,

विक्रमादित्य का आक्रोश…… राणा विक्रमादित्य ने एक दिन बड़ी बहन उदयकुँवर बाईसा को बुला कहा- ‘जीजा ! भाभी म्हाँरा को
बैठे घनश्याम सुन्दर खेवत हैं नाव । आज सखी नन्दलाल के संग खेलवे को दाव ।। पथिक हम खेवट तुम
श्रीहरिः उरहनो देन मिस गयी श्याम दरस को ‘श्याम सलिले यमुने ! यह श्याम रंग तुमने कहाँसे पाया ? कदाचित

भोजराज की आँखों के चारो ओर गड्ढे पड़ गये थे।नाक ऊँची निकल आई थी।नाहर से खाली हाथ लड़ने वाला उनका