भगवान (Bhagvan)

मीरा चरित भाग-29

मीरा ने एक बार और लौट जाना चाहा, किन्तु फूलाँ की जिद्द से विवश होकर वह साथ हो ली। यों

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मीरा चरित भाग- 28

‘बस, इतनी-सी बात? लो पधारो। मैं चलती हूँ भोजन करनेके लिये। आपके मुख से भोजन का नाम सुनते ही जोर

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मीरा चरित भाग- 27

अपनी दशा को छिपाने के प्रयत्न में उसने सखियों की ओर से पीठ फेरकर भीत पर दोनों हाथों और सिर

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मीरा चरित भाग- 26

‘नहीं बेटा! पर वे मीरा के शिक्षा गुरु हैं, दीक्षा गुरु नहीं।’–दूदाजी ने उत्तर दिया।‘आप रुकिये न भाई!’- मीराने हँसकर

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मीरा चरित भाग-25

तुम्हारे गिरधर ही तुम्हारे रक्षक हैं। अभी डेढ़ महीना और रहूँगा यहाँ।’ मीराके एकादश वर्ष में प्रवेश के तीसरे ही

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