
[151]”श्रीचैतन्य–चरितावली”
।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामधन मांगने वाले भृत्य को दण्ड धनमपि परदत्तं दु:खमौचित्यभाजांभवति हृदि तदेवानन्दकारीतरेषाम्।मलयजरसविन्दुर्बाधते नेत्रमन्त-र्जनयति च

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामधन मांगने वाले भृत्य को दण्ड धनमपि परदत्तं दु:खमौचित्यभाजांभवति हृदि तदेवानन्दकारीतरेषाम्।मलयजरसविन्दुर्बाधते नेत्रमन्त-र्जनयति च

उ०- शरीर से आत्मा के वियोग होने को मृत्यु कहते है।प्र०- क्या आत्मा अपनी इच्छा से दूसरे शरीर मे प्रवेश

“बरसाना”बरसाने की पीली पोखर से प्रेम सरोवर जाने वाले रास्ते से कुछ हटकर वन प्रांत में एक पुराना चबूतरा है।

न जाने कौन से गुण पर कृपा निधि रीझ जाते है द्वापर में चक्रिक नामक एक भील वन में रहता

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामछोटे हरिदास को स्त्री-दर्शन का दण्ड निष्किंचनस्य भगवद्भजनोन्मुखस्यपारं परं जिगमिषोर्भवसागरस्य।संदर्शनं विषयिणामथ योषितांचहा हन्त

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामरघुनाथदास जी का उत्कट वैराग्य य: प्रव्रज्य गृहात् पूर्वं त्रिवर्णवपनात् पुन:।यदि सेवेत तान्

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामश्री रघुनाथदास जी का गृह त्याग गुरुर्न स स्यात् स्वजनो न स स्यात्पिता

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामनीलाचल में सनातन जी वृन्दावनात् पुन: प्राप्तं श्रीगौर: श्रीसनातनम्।देहपातादवन् स्नेहाच्छुद्धं चक्रे परीक्षया।। श्री

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामप्रभु का पुरी में भक्तों से पुनर्मिलन अद्यास्मांक सफलमभवज्जन्म नेत्रे कृतार्थेसर्वस्ताप: सपदि वरितो

शिव महामन्त्र ॐ नम: शिवाय,ॐ नम: शिवाय, हरहर बोले नम: शिवाय।रामेश्वराय शिव रामेश्वराय,हरहर बोले नम: शिवाय।गंगाधराय शिव गंगाधराय,हरहर बोले नम: शिवाय।जटाधराय शिव जटाधराय,हरहर बोले नम: शिवाय।सोमेश्वराय शिव