
भगवान कृष्ण बलराम का बछङो की पुंछ पकङना
राधे राधे ब्रजराज गौशाला में बछड़ों भी सँभाल करने गये हैं और ब्रजरानी अपने प्राणधन ललन के लिये भोजन बनाने

राधे राधे ब्रजराज गौशाला में बछड़ों भी सँभाल करने गये हैं और ब्रजरानी अपने प्राणधन ललन के लिये भोजन बनाने

.श्री नर्मदा किनारे एक उच्च कोटि के संत विराजते थे जिनका नाम श्री वंशीदास ब्रह्मचारी जी था।.उनका नित्य का नियम

“सँवारते हुये, प्रेम से प्रियतम की बिखरी हुयी घनी काली घुँघराली कजरारी अलकें ! अपने आँचल से थीं पोछीं कृष्ण

!! †* बधाई हो ! बधाई हो ! नाचती गाती गोपियाँ लौट रही थीं नन्दालय से । पूतना देख रही

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामधीर-भाव निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तुलक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेच्छम्।अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे

.श्रीराम का वनवास ख़त्म हो चुका था..एक बार श्रीराम ब्राम्हणों को भोजन करा रहे थे तभी भगवान शिव ब्राम्हण वेश

. श्रीजयदेव जी भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमी भक्त थे। आपके हृदय में श्रीकृष्ण प्रेम हिलौरे लेता रहता था। उसी

श्री राधा कितना सुंदर भाव है प्रेम ॥संसार में प्रेम को सर्वाधिक मधुर भावना माना जाता है ॥ जबकी संसार

21 दिसम्बर सन सत्रह सौ चार…छह महीने से पड़े मुगलों के घेरे को तोड़ कर अपनी चार सौ की फौज

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामश्रीवास के घर संकीर्तनारम्भ चेतोदर्पणमार्जनं भवमहादावाग्निनिर्वापणंश्रेयःकैरवचन्द्रिकावितरणं विद्यावधूजीवनम्।आनन्दाम्बुधिवर्द्धनं प्रतिपदं पूर्णामृतास्वादनंसर्वात्मस्नपनं परं विजयते श्रीकृष्णसंकीर्तनम्।। सम्पूर्ण