
[33]”श्रीचैतन्य–चरितावली”
।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम प्रकृति-परिवर्तन परोपदेशकुशला दृश्यन्ते बहवो जनाः। स्वभावमतिवर्तन्तः सहस्रेष्वपि दुर्लभाः।। बाल्यावस्था का स्वभाव आगे

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम प्रकृति-परिवर्तन परोपदेशकुशला दृश्यन्ते बहवो जनाः। स्वभावमतिवर्तन्तः सहस्रेष्वपि दुर्लभाः।। बाल्यावस्था का स्वभाव आगे

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम भक्तिस्त्रोत उमड़ने से पहले तावत्कर्मणि कुर्वीत न निर्विद्येत यावता। मत्कथाश्रवणादौ वा श्रद्धा

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम बाल्य-भाव दिग्वाससं गतव्रीडं जटिलं धूलिधूसरम्। पुण्याधिका हि पश्यन्ति गंगाधरमिवात्मजम्।। ‘इस काम के

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम अलौकिक बालक स्वगर्भशुक्तिनिर्भिन्नं सुवृत्तं सुतमौक्तिकम्। वंशश्रीतिलकीभूतं मन्दभाग्यस्य दुर्लभम्।। शची-रूपी सीपी के भाग्य

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम श्रीगयाधाम की यात्रा यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।। आश्विन शुक्ला

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम प्रेम-स्त्रोत उमड़ पड़ा श्रृण्वन्सुभद्राणि रथांगपाणे- र्जन्मानि कर्माणि च यानिलोके। गीतानि नामानि तदर्थकानि

*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *प्रादुर्भाव* कालान्नष्टं भक्तियोगं निजं

।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *वंश-परिचय* कुलं पवित्रं जननी

श्री हरि *औ कि जहाँ काला हिरन स्वेच्छा से विहार न करता हो, जहाँ ब्राह्मणों की भक्ति न होती हो

।। श्रीहरि [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम नदिया में प्रत्यागमन एवंव्रतः स्वप्रियनामकीर्त्या जातानुरागो द्रुतचित्त उच्चैः। हसत्यथो रोदिति रौति गाय-