
जग रूठे तो रूठे
जग रूठे तो रूठे रे मैहर वाली न रूठे, शारदा भवानी मैहर वाली न रूठे, जग रूठे तो रूठे रे

जग रूठे तो रूठे रे मैहर वाली न रूठे, शारदा भवानी मैहर वाली न रूठे, जग रूठे तो रूठे रे

बचेया नु रेहनदिया उडीका माये तेरिया ना लाया कर माँ एहनी देरिया माँ इक पल हुंदा औन लई माँ इक

माँ शारदा मैया के मंदिर को जाना है, महिहर की मिटी को माथे से लगाना है, माँ शारदा मैया के

मान जाना दाई वो, मान जाना वो॥ आरती थारी हुम अगियारी खाड़ा खप्पर तोर दुवारी। झन रिसियाना दाई वो….. का

दर्शन तब दूंगी कि पहले बोल मेरा जयकारा मैया के द्वारे एक अँधा पुकारे आँखे तब दूंगी, कि पहले बोल

भजा दे ढोलक तू ढोलकियाँ छमा छम नाचे लांगुरिया, जगराते की रात है आई सब के मन में खुशिया छाई,

मैं मंगता तेरे दर माँ आज मंगा इक वरदान माँ, कण कण दे विच तू वसदी ऐ, ऐ मेरा वसदा

ओह्दी रज़ा च राज़ी रह भगता तू हर पल ध्यान लगाया कर तेरा शुक्र दातीये कह भगता ओह्दी रज़ा

दर्शन दे प्यासे नैणा ने तेरे आन दी आस लगाई होई ऐ, अवे न लारा ला आंबे तेरे नाम दी

सुखा दी सवेर कर हुन नहियो देर कर सबना दी मेहर कर झंडेवाली माँ इतनी अर्जी साडी दाती मंजूर कर