
मेरे कंठ बसों महारानी
मेरे कंठ बसों महारानी मेरे सवरो को अपना स्वर दो, गाऊ मैं तेरी वाणी मेरे कंठ बसों महारानी………. जीवन का

मेरे कंठ बसों महारानी मेरे सवरो को अपना स्वर दो, गाऊ मैं तेरी वाणी मेरे कंठ बसों महारानी………. जीवन का

लै बिंदी सिंधूर नी माएँ आह लैपा लै चूड़ियाँ, बेह बचेया दे साहमने आ के गला करिए गुड़ियाँ लै बिंदी

तेरा मेरा है क्या रिश्ता ओ माँ .. तेरा मेरा क्या रिश्ता … पर जितना किया ..तूने जितना किया …

मेरी आँखों से आंसू बरसे है मैया कैसे करू मैं तेरी विदाई, नो दिनों तेरे आंचल में कैसे सहू गी

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो मुझको नवल उत्थान दो माँ सरस्वती मुझको वरदान दो, मुझको नवल उत्थान दो , माँ

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।मांग सिन्दूर

लागिया ने रोनका द्वारे तेरे दातिए, वादीया च गूंज दे जयकारे तेरे दातिये, लागिया ने रोनका द्वारे तेरे दातिए हर

खूब सजाया मईया तेरा दरबार , आओ शेरोंवाली हो के शेर पे सवार, साथ मे हो लंगर वीर साथ भैरो

मैं बनना चाहता हु माँ तेरे गूँज जैकारो की, माँ गूंज जैकारो की तेरे दरबारों की, मैं बनना चाहता हु

बड़ी मौज में है तेरे लाल दातिए शुक्र तेरा, तूने कर दियां माला माल दातिए शुक्र तेरा, दौलत शोरथ कर