
लगदे साउन नू मेले
लगदे साउन नु मेले माँ तेरे मंदिरा ते सत रंग दी पींघ माँ पै गई नीले नीले अम्बरा ते लगदे

लगदे साउन नु मेले माँ तेरे मंदिरा ते सत रंग दी पींघ माँ पै गई नीले नीले अम्बरा ते लगदे

जगदम्बे भवानी मैया, तेरा त्रिभुवन में छाया राज है। सोहे वेश कसुमल निको, तेरे रत्नों का सिर पे ताज है॥

आये तेरे भवन देदी अपनी शरण, रहे तुजमे मगन थाम कर ये चरण, तन मन में भक्ति ज्योति तेरी हे

मन मेरा मंदिर आँखे दिया बाती, होंठो की हैं थालिया, बोल फूल पाती। रोम रोम जीभा तेरा नाम पुकारती, आरती

मईया जी का सजा दरबार, चलो रे सब माँ के भवनवां, मईया जी का ऊँचा दरबार, चलो रे सब माँ

मैया ओह गंगा मैया, मैया ओह गंगा मैया, गंगा मैया मे जब तक यह पानी रहे, मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर सहारा तू है सहारा जब हमारा तो माता रानी कैसा

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार माँ हर इक मन में बस्ती है भगतो पे

मैया जी आई मैया जी आई शेर पे सवार होके मैया जी आई, ऊंचे पहाड़ो से आई है शेर पे

हे जगदम्बा जगत तारनी अम्बा मात भवानी अपनी शरण में लेलो मैया मैं मुर्ख अज्ञानी बोलो जय माता जय माता