
भर दे भर दे मात मेरी झोलियाँ भर दे
चिंतपुरनी मात माँ मेरी चिंता हर दे, भर दे भर दे मात मेरी झोलियाँ भर दे, मेहँदी वाला हथ तू

चिंतपुरनी मात माँ मेरी चिंता हर दे, भर दे भर दे मात मेरी झोलियाँ भर दे, मेहँदी वाला हथ तू

चौथा जब नवरात्र हो, कुष्मांडा को ध्याते। जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है करवाते॥ आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।

जेहड़े माँ नाल करदे प्यार भंगड़ा पावन गये, नच नच के चावा नाल ख़ुशी मनावन गये, जेहड़े माँ नाल करदे

सब ते कर्म कमाओंदी है मेरी दात कालका, बचियाँ न दरस दिखाउंदी है मेरी दात कालका, सारे जग दी पालनहारी,

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है, मेरे घर का इक इक पत्थर तेरा कर्ज धार है, देख गरीबी

जमी से आसमाँ तलक देख रहा हूँ सितारों मे तेरे जलवो की झलक देख रहा हूँ अब ओर किसी चीज़

जय माँ शैलपुत्री प्रथम, दक्ष की हो संतान। नवरात्रे के पहले दिन करें आपका ध्यान ॥ अग्नि कुण्ड में जा

जय माँ रुद्राणी ब्रम्हाणी की !! भक्तों ! राजस्थान की धरती पर एक ऐसा पावन पुण्य स्थान है , जहां

हे महारानी जग कल्याणी आया मैं तेरे द्वार दर्शन दी आशा मन विच लेके खड़ा में तेरे द्वार बच्चे हां

धुन चल वेख शोंक मेले दी, माये दीवाने दर्शन दे, तेरे दर तो मुरादा पाउदे, ते नच्दे गाउंदे दीवाने, जय