
पाथरी आली कमाल करती है
पाथरी आली कमाल करती है तेरे अपने भगत ने मईया माला माल करती है, पाथरी आली कमाल करती है ध्वजा

पाथरी आली कमाल करती है तेरे अपने भगत ने मईया माला माल करती है, पाथरी आली कमाल करती है ध्वजा

सर को झुकालो, शेरावाली को मानलो, चलो दर्शन पालो चल के | करती मेहरबानीयाँ , करती मेहरबानियां || गुफा के

मन की मुरादें, पूरी कर माँ, दर्शन करने को मैं तो आउंगी | तेरा दीदार होगा, मेरा उधार होगा, हलवे

आई माताजी रा बैलीया रे, गला में घुंगर बाजे, अरे गला मे घुंगर बाजे आईजी, भगतो रा कारज सारे, बैल

क्रीट कुंडल पहन डाले काज़ल नयन , माई अँगना पधारीं, मज़ा आ गया । होंठ लाली लगी माथे बिंदिया सजी,

जहां ले चलोगी वहीं मैं चलूंगा उंगली पकड़ के मां संग संग रहूंगा दुख में भी तुम मा सुख में

कोई भी न कमी छड़ी शेरावाली ने, हर इक ख़ुशी दिति मेहरावाली ने, हर था ते लाजा राखी एह दी

ला दे दातिए अपने नाम वाली मेहँदी, नाम वाली मेहँदी जेहड़ी कदे वी नहीं लैंदी, यह मेहँदी नहीं मिलदी बाज़ारो,

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की, छम छम करती पायल उसकी याद दिलाये मैया की

एह मूर्ति नही एह सची माँ ऐ जे दिलो बुलाओ गे एह बोल्दी ता एह एह मूर्ति नही एह सची