
माँ को मनाऊ चुनरी उढ़ाकर
एसी चुनरी तू रंगदे हो रंगले, माँ को उडाऊ शीश जुकाकर, तेरे नाम की भी मैं अर्ज करू माँ को

एसी चुनरी तू रंगदे हो रंगले, माँ को उडाऊ शीश जुकाकर, तेरे नाम की भी मैं अर्ज करू माँ को

पंजाबीयों की शान वखरी, भक्तो की शान वखरी । कोई माई दर जाए, कोई साई घर जाए, कोई जाए गुरां

तोरे जस ल गावंव वो, महिमा सुनावंव वो, अंतस भीतरी वो दाई, तोला सोरियाँवव॥ दाई शीतल शीतल शीतल, जगजननी बिमला

तेरिया चरना विच मेरी अरदास माता की सुपने विच वी न डोले मेरा विश्वाश माता तेरिया चरना विच मेरी अरदास

तेरे नाम की लगी है लगन माता। हमे कब होंगे तेरे दर्शन माता॥ हाथ जोड़ खड़े, आस लगाए, खली दामन

रेहमता माये तेरिया होगियां तंगियां गरीबिया माँ पला विच ओह गइया, रेहमता माये तेरिया होगियां तरेया रंगा दे विच तन

जय अम्बे माँ अम्बे जय अम्बे, आये माँ दरबार तुम्हारे दीन दुखी तेरे बच्चे सारे, जय अम्बे माँ अम्बे जय

आजा माँ तेनु अखियां उडीकदीयां | अखियां उडीकदीयां, दिल वाजा मारदा || तेरे बिना कौन तेरे लाल को संभाले माँ,

माये नी असी औंदे रहना, तेरे दर ते शीश झुकवान नु, तल मंदिरा खडकावन नु, तेरे दर ते अलख जगावन

हम को तू दर्शन दिखा अम्बिके, बिगड़ा मुकद्दर बना अम्बिके । कब से खड़े तेरे द्वार। चरणो से अपने लगा