
कब से खड़ा मैं तेरे द्वार
ओ शेरोवाली माँ करो मेरा भव से बेडा पार कब से खड़ा मैं तेरे द्वार मेरा हो जाए उधार दया

ओ शेरोवाली माँ करो मेरा भव से बेडा पार कब से खड़ा मैं तेरे द्वार मेरा हो जाए उधार दया

एक बार नही सो बार नही, मैं ता आज करा लख वार, मैं होर कुझ नहियो मंगदा, मैं तर्द्रुस्त परिवार,

मेरा जीवन तेरी शरण। सारे राग विराग हुए अब, मोह सारे त्याग हुए अब। एक यही मेरा बंधन, मेरा जीवन

मेरी विनती, यही है अम्बे रानी , ‘कृपा बरसाए रखना’,,माँ हे महाँरानी,,,,’कृपा बरसाए रखना’ *हे अम्बे रानी,,, ‘कृपा बरसाए रखना’

भेजा है भुलावा तूने शेरावालिये, मईया तेरे दरबार में तेरे दीदार को मैं आउगा, कभी न फिर जाउगा, भेजा है

एहो माई ए जेहड़ी सारेया नु तार दी हो सारेया नु तारदी ते मेनू क्यों न तार दी एहो माई

सुना है तू दयालु माँ बहुत करुना दिखाती है बुलाये मन से अगर बेटा तो माता आ ही जाती है

लचके है निमिया की ढाली ओह देवी मैया लहरें चुनरिया है ढाली, तुम ही धुप हो तुम ही छाया तू

तेरे दर जो आया है माँ वो खाली कभी न गया, तेरे गुण जो गाता है मैं उसका कल्याण तूने

दुनिया से सहारा क्या लेना तेरा एक सहारा काफी हैं, कुछ कहने की क्या जरूरत हैं, तेरा एक इशारा काफी