
शेरावाली माँ मेरी मेहरवाली माँ
चल के दर तेरे आये श्रद्धा सुमन ले आये, शेरावाली माँ मेरी मेहरवाली माँ, बोल ते सवाली सारे तेरे तेरा

चल के दर तेरे आये श्रद्धा सुमन ले आये, शेरावाली माँ मेरी मेहरवाली माँ, बोल ते सवाली सारे तेरे तेरा

अपने नाम की ज्योत जगा दे जो कभी मन से भुजने ना पाए, जिस हाल से माँ मैं गुजरू,बस भरोसा

तेरी उची अटरियाँ कैसे आऊ माँ, सनन सनन पावन चले और चले पुरवइयाँ आऊ के न आऊ ये भी सोच

मेरी मैया की पायल सुनार झड़ दे, मैं तो पहनाऊ गी माँ के पैरो में, माथे पे बिंदियां लाल चुनरियाँ,

जे माँ दुःख सब दे हरदी ए, ते सानु ना क्यों करदी ए । दुःख डाडे मैं हाँ कमजोर किन्नू

लिखे माँ चिट्ठियां तू सारे जग को, पर मेरी ही मइयां क्यों वारि न आई, नवराते लौट के लो फिर

लाल चुदा लाल चोला चुनरी भी लाल माये नन्हे मुने चेहरे दस जावा ही कमाल माये, चित करे चरना च

मेरी मां अंबे दुर्गे भवानी किस जगह तेरा जलवा नहीं है तेरा जलवा कोई कोई देखे हर किसी का मुकद्दर

सतरंगी माई सतरंगी मोरी माँ की चुनरियाँ सतरंगी लै चुनरी कान्हा जी आवे, रुक्मणि जी के रूप सजावे, लै चुनरी

माता महादेवी है नाम,विराजी दशरमन में सेवा में पंडा हज़ार,माई की मढुलिया में माता महादेवी है नाम …. आप विराजी