
ओ गंगा तुम गंगा बहती हो क्यूँ
विस्तार है आपार, प्रजा दोनों पार करे हाहाकार निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ विस्तार है आपार,

विस्तार है आपार, प्रजा दोनों पार करे हाहाकार निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ विस्तार है आपार,

लाइना विच खड़ के सारे तेरे ना दे लाऊँन जय कारे, आये हां आसा लैके माँ करदो पार उतारे, सब

नाम दी मस्ती दे दे मेनू मैं ध्यावा सांझ सवेरे तक तक तेरिया राहवा माये मैं आवा तेरे नेड़े तेरी

गल पा के मैया दियाँ चुन्नियां, अज्ज मैनु नच लैण दे, ज्योतावाली, शेरांवाली, जीहनु केहन्दे मेहराँवाली, सारी दुनिया नूँ दस्स

ਰੰਗ ਬਰਸੇ, ਰੰਗ ਬਰਸੇ ਦਰਬਾਰ ਮਈਆ ਜੀ ਤੇਰੇ ਰੰਗ ਬਰਸੇ । ਉਚਿਆਂ ਪਹਾੜਾ ਦੀਆਂ ਠੰਡੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ, ਸੁਰਗਾਂ ਨੂੰ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੇ

मंदिर दे कोन्या च दे दे कोई कोना माँ, जित्थे बह के रो लाइए उमरा दा रोना माँ, लोका अग्गे

बिना मांगे दित्ता ऐ माँ सानू तू बथरा शुकर माँ करा तेरा शुकर माँ तेरा तेरा शुक्रिया, तेरा शुक्रिया तेरा

लगीया रोनका बड़ीआ माँ तेरे मंदिरा ते, ओ मंदिरा ते माँ मंदिरा ते माँ मंदिरा ते माँ मंदिरा ते, आज

मोहे दरस दिखा, दुर्गे मईया llxll मैंने ओट है माँ, तुमरी लईया ll मोहे दरस दिखा,,,,,,,,,,,,,,,,,, चरण कमलों में मईया,

आज है जगराता माई का माँ को मना लेना अरे ये भैया जी जरा ताली बजा लेना ॥ हाथ उठा