
मेरे मन की उडी पतंग
मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर, अटके न भटके कही उड़े ये ब्रजमंडल की और,

मेरे मन की उडी पतंग पकड़ लो श्याम पतंग की डोर, अटके न भटके कही उड़े ये ब्रजमंडल की और,

तेरी दर्शन की आस में तेरी देखु मैं कब से राह फटाफट आजा संवारे मोसम की रंगत देख के मेरे

ऐसी धूम मचायो जी ब्रिज में आइयो नन्द गोपाल. आयो नन्द गोपाल देखो आयो नन्द के लाल, सब नाचो गाओ

उल्जनो की ये सुलझे घडी श्याम बजले घडी दो घडी, श्याम सुमिरन का धन साथ देगा जग की माया कब

राज़ी तेरी राजा में मुझे एतराज़ क्या हैं, तेरे पास बिजलिया हैं मेरे पास आशियाना, तेरे नाम ने बना दी

चरना विच रखेया इ चरना विच रुल जावा जो किते मेरे ते उपकार न भूल जावा असी दर दर रुल्दे

कृष्णा कृष्णा बोल मन राधे राधे बोल रे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा राधे राधे बोल रे, मीरा जो पी गयी

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु आज आकर भुलाना ये ठीक नहीं, हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है

आई आई आई कान्हा तेरी याद आई मेरे दिल की धड़कन ने आवाज लगाई आई आई आई कान्हा तेरी याद

पिया सोने न मैं तो जाऊगी, तेरी बाहो में सो जाऊगी, मुझे प्यार का गीत सूना दे, श्याम इक काम