
कन्हैया प्रेम के बंसी बजाना तुम को आता है
कन्हैया प्रेम के बंसी बजाना तुम को आता है, लगा के प्रीत इस दिल से निभाना तुम को आता है,

कन्हैया प्रेम के बंसी बजाना तुम को आता है, लगा के प्रीत इस दिल से निभाना तुम को आता है,

मेरो चित्त चोर लियो, गिरिधारी रे बनवारी रे । अव्चक ही कुंजन में भेंटे, मदन मोहन गिरिवर धारी । सघन

कान्हा बांसुरी बजावे राधा छम छम नाचे रे छम छम नाचे रे पी की प्याल बाजे रे कान्हा बांसुरी बजावे

श्याम तेरा साथ मुझे उम्र भर मिले, रोज तेरा दर्शन का अवसर मिले, श्याम तेरा साथ मुझे उम्र भर मिले,

मैं कमली हो गई श्याम तेरी कमली हो गई, ऐसी कमली बनाया मुझको ऐसा बना न कोई, मैं कमली हो

तू सब जानता है,तुझे क्या बताये, मैं जग से छुपा है मेरा हाल दिल ये, मगर तुमसे बाबा छिपे न

कान्हा ने हां कान्हा ने गोवर्धन लियो उठाई अधर कान्हा ने कान्हा ने हां कान्हा ने गोवर्धन लियो उठाई अधर

मैं आई श्याम तेरे धाम के झोली भर देना, मैं रटू तेरा ही नाम के झोली भर देना, भर देना

संवरियो जादू कर गियो मे क्या करू रे कानुडो कामन कर गियो मई क्या करू हलरी दुलरी और पंचलरी अरे

दुनिया में दातार बहुत है दिखलाते दातरी, छोटा मोटा माल कमा कर बन बैठे व्यपारी, सेठो में सेठ है निराला