
जहाँ बनती है तक़दीरें
जहाँ बनती है तक़दीरें अजूबा दवार है तेरा, लजाये फूल भागीचे गज़ब शृंगार है तेरा, चमकता ये तेरा चेहरा तेरी

जहाँ बनती है तक़दीरें अजूबा दवार है तेरा, लजाये फूल भागीचे गज़ब शृंगार है तेरा, चमकता ये तेरा चेहरा तेरी

आजा आजा पिया आ सांवरे पिया आस ऐसी लगी बस तेरे दर्श की नैना देख रही बस तेरी ही छवि

श्याम नाम अति मीठा है कोई गा के देख ले आ जाते है श्याम कोई बुला के देख ले, आ

ऐसी बंसी बजाई नन्द लाल ने, मेरे तन मन में बस गए श्याम राधा नाचे झूम के , तू तो

संवारे पट वा दे पट वा दे अब तो मेरा काम दिखाए नखरे क्यों इतने सुबहो शाम अगर कहो तो

मुरली बजावैं कान्हा ब्रिज में, मुरली बजावैं कान्हा, सुन धुन राग मधुर मुरली की, सब पाछे पाछे धावैं ब्रिज में,

खुद से चल जाती नईया जो हमारी, तो फिर ना होती दरकार तुम्हारी, मेरे मजी बन जाओ मेरी नाव चला

नजरे झुका के बहाना बना के छुपे छुपा के सब से बचा के जाने है सभी न चले तू रागे

सांवरिया लो संभाल कही न खो जाऊ, कुछ ऐसा करो कमाल के तेरा हो जाऊ, मैं दीखता अकेला हु पर

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जानकि अंग अंग बॉस समानी, प्रभु जी, तुम घन, बान हम मोरा, जैसे चेतवंत