
कान्हा से है प्यार का बंधन
कान्हा से है प्यार का बंधन शरधा से करता हु मैं बंधन, रोको तो कोई मेरे श्याम को क्यों रूठा

कान्हा से है प्यार का बंधन शरधा से करता हु मैं बंधन, रोको तो कोई मेरे श्याम को क्यों रूठा

ऊँगली पे कन्हैया नचावे दुनिया सारी नचावे दुनिया सारी नचावे दुनिया सारी कान्हा को नचावे हमारा राधा रानी ऊँगली पे

हो मच गेयो नन्द भवन में शोर यशोदा लला जायो है यशोदा लला जायो है हो खुशिया छाई चारो और

तुझे कान्हा कहू के तुझे नन्द लाला मोहन कहू की मुरली वाला, सवाली सूरत से सब को लुभाता मीठी मीठी

देख मटकी पे मटकी कन्हिया जी को खट की अब खटकी तो मन न समाई रे कान्हा कंकरियां जोर की

श्याम श्याम बोलते ही सामने ही आ गया , रोटी हुई आखियो को हसना सीखा गया, श्याम श्याम बोलते ही

श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है। गोपाला हरी का प्यारा नाम है, नंदलाला हरी का

मैं तेरे द्वार पे आया हु हार के, मुझसे नजरे चुराने की कोशिश न कर, थामा दामन तेरा मेरे श्याम

सुनो सखी मोरी प्यारी कर पिया के मिलन की तियारी, दो दिन का पियर ठीकाना, फिर अन्त ससुर घर जाना

बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी शिव समाधि भूल गये, ऋषि मुनि की नारी । वेद पढ़त ब्रह्मा भूले, भूले