
मुरली मधुर बजा दे कान्हा
मुरली मधुर बजा दे कान्हा, अधरन पे तोरी मैं लूट जाऊँ, मन्द मन्द मुस्का दे कान्हा, मुरली मधुर बजा दे

मुरली मधुर बजा दे कान्हा, अधरन पे तोरी मैं लूट जाऊँ, मन्द मन्द मुस्का दे कान्हा, मुरली मधुर बजा दे

कल सुपने च होई मुलाक़ात वे, मेरे वस च नही जज्बात वे, ओ तेरियां ही गल्ला करदी सी वे मैं

तार नाल तार नु मिलाके वेख ले, आवेगा जवाब तार पाके वेख ले, तार पाई मीरा ने जवाब आया सी,

सावरे बिन तुम्हारे गुजारा नहीं तेरे सिवा कोई हमारा नहीं जब से देखा सावरे, जलवा तुम्हारा, दिल तुझ पे है

मुझे हो गया तुमसे प्यार सांवरियां मैं क्या करू, हुई आंखे तुमसे चार सांवरिया मैं क्या करू, मुझे हो गया

होवेगी जरूर किरपा मेरे श्याम की तुम देखना , करेगे खाटू के श्याम कर्म तुम देखना, होवेगी जरूर किरपा मेरे

राधा बन गई न्यायधीश और ललिता कप्तान के पकड़े गए कृष्ण भगवान ॥ एकदिना ग्वालिन घर जाकर माखन खाने लगे

कान्हा ने किया मिस कॉल राधा बोली हेलो हेलो, कान्हा ने पूछा कहा रहती हो, बरसाना मेरा गांव राधा बोली

कान फड़के यशोदा पुछेया, तू चोरी करना किथो सिखिया, बाह फड़के यशोदा पुछेया, तू चोरी करना किथो सिखिया, माता यशोदा

मोहे भा गया बंसी वाला, बन गई जोगणियां बनी मैं जोगणियां, वो काली कमली वाला बन गई जोगणियां, मुस्काये मीठा