
कहियो रे यशोदा ने
सुन यशोदा माँ यशोदा, तेरो बिगड़ गयो नन्द लाल कहियो रे यशोदा ने, कंकर मार के मटकी फोडे, पकड़ के

सुन यशोदा माँ यशोदा, तेरो बिगड़ गयो नन्द लाल कहियो रे यशोदा ने, कंकर मार के मटकी फोडे, पकड़ के

श्री वृन्दावन धाम प्रभु का याहा सम्बल कर आना जी रॉक दवेष बिकार बासना याहा न लेकर आना जी श्री

कोरोना दूर भगाओ बाबा दुनिया पे संकट आया, मोरछड़ी लेहराओ अब तो जग सारा गबराया, कोरोना दूर भगाओ बाबा पूरी

कृष्णम वन्दे नन्द कुमारं राधा वल्लभं, नवनीत चोरं मुरलीधर सुकुमार शरीरं गोपी वल्लभ नन्द किशोरं रामं वन्दे दशरथ तनयं सीता

श्याम बंसी बजाते हो या मुझे बुलाते हो, दीवाना बनाते हो सारी रात जगाते हो, कभी पायल बजाती हो या

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा, मोर मुकुट वारे, घुंघराली लट वाले। तुम बिन मोहन चैन पड़े ना, नयनो से

मैं बन के मोर रंगीला श्री यमुना तट पे जाऊ, तुम मुरली मधुर बजाओ मैं प्रेम से नाचू गाउ मैं

तेरी बांसुरी पे कान्हा नाचे सारा ज़माना, जिसे नाचना ना आये वो भी करे न बाहना, कही नाचे राधा रानी

कान्हा खो गया दिल मेरा तेरे वृंदावन मे तेरी मुरली की धुन जो बजती है, सारी गोपियों को प्यारी लगती

ऐ मेरे श्याम लौट के आजा, बिन तेरे जिन्दगी अधुरी है, आ के तो देख मेरी हालत को, बिन तेरे