
मुरली ने लुट लेया चैन कन्हियाँ तेरी मुरली ने लुट लिया चैन,
पता नि की मेरे उते की होया जादू टोना चारो पासे द्सिदा है मुखड़ा सलोना गली गली लभ्दी फिरा न

पता नि की मेरे उते की होया जादू टोना चारो पासे द्सिदा है मुखड़ा सलोना गली गली लभ्दी फिरा न

काहे गबराते है दिल और काहे उदास है, मुरलीधर मनमोहना दिल तेरे पास है, काहे गबराते है दिल और काहे

रसना में अगर तेरा नाम रहे जग में फिर नाम रहे ना रहे दिन रेहन हरी का ध्यान रहे, सुख

हरी हरी हरी हरी सुमिरन करौ हरी चरणान वृन्द उर धरौ हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे

श्याम तेरी बंसी बजने लगी, सारी सारी रात मैं तो जगने लगी, बंसी बजा के मेरा मन कर लियाँ, तेरी

मेरी श्याम से हो गयी लडाई मनाने बरसाने आयो उस छलियाँ से रोसा रसाई मनाने बरसाने आयो जाऊ नहाने नदिया

श्री भीष्म उवाच – इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वत पुङ्गवे विभूम्नि । स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिमुपेयुषि यद्भवप्रवाहः ॥१॥ त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं रविकर

कान्हा जी मोहें प्रीत की रीत सिखा दो, हिंय धरि हरी दरसन नित पाऊँ, मोरे मन बीच विरह जगा दो,

कृष्ण मुरारी खोलो किवाड़ी भक्त खड़े तेरे द्वार दर्शन पाने खातिर हमको सब कुछ है स्वीकार श्याम तू दर्शन देदे

जो भजते मुझे भाव से मैं उनका ही बन जाता, उनका ही बन जाता मैं तो उनका ही बन जाता