
तेरी पसंद की खीर
तेरी पसंद की खीर कन्हिया क्यों तू नही है खाता, कैसे सेहती होगी ये सब नखरे यशोदा माता, इतर के

तेरी पसंद की खीर कन्हिया क्यों तू नही है खाता, कैसे सेहती होगी ये सब नखरे यशोदा माता, इतर के

श्री भानु भरत के प्यारे, ब्रिज मडल के उज्यारे, तोपे जाऊ मैं बलिहार,मैं तेरो नचाओ नाचू, मेरे रमन बिहारी लाल

वृन्दावन बुला लो सांवरिया मेरा हाथ पकड़, रूप तेरे में खो जाऊ मैं, तेरा दीवाना हो जाऊ मैं, कोई रस

हाथो में है मोरछडी और इक हाथ में निशान आई तेरे दर पे बाबा रख ले मेरा मान रखलो मेरी

मेरा श्याम बड़ा चित चोर मुझको खीचे अपनी और न और दिखे न शोर मुझको खीचे अपनी और नैन मिला

कान्हा रे थोडा सा प्यार दे, चरणो मे बैठा के तार दे। ओ गौरी घुंघट उभार दे, प्रेम की भिक्षा

तुमने किसी नसीब को बदले हुए देखा है, देखो दयालु श्याम ने ये काम कर दियां है, दरबार का नियम

तू छुपी कहा है मैया है कहा तेरा ठिकाना दर दर भटक रहा है कब से तेरा दीवाना, तू छुपी

मेरे अंदर अंदर कोण माता यशोदा बोले, मोहन ता मेरा हारावाला, हो नागावाला कोण माता यशोदा बोले, मेरे…….. मोहन ता

बोले नंदलाला सुनो यशोमती मैया, मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर, मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे, राधा रानी