
आज बृज में होरी रे रसिया
आज बृज में होली रे रसिया। होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥ अपने अपने घर से निकसी, कोई श्यामल कोई

आज बृज में होली रे रसिया। होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥ अपने अपने घर से निकसी, कोई श्यामल कोई

वृंदावन आई हु तुझसे मिलने को बरसाने से आई हु कजारे नैनो ने जादू सा कर डारा, लट लटके काली

मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी, मेरे जन्मो के साथी सजन। पग नूपुर्रो की झंकारो से, भावो भरे मधुर इशारों से,

सुमिरन श्री राधा का, हल है हर बाधा का भज मन मेरे कट जायगे संकट तेरे…. लाख बादल हो गम

बनकर तेरी श्याम दीवानी, सुध बुध बिसरा बैठी हूँ चाहे जो कह ले दुनिया तुम्हें अपना बना बैठी हूँ मैंने

तू मेरे रूबरू मैं तेरे रूबरू रहमतों का निशाँ और क्या चाहिए तू कहे कुछ मुझे मैं कहूं कुछ तुझे

करो कृपा मेरी राधे,तेरे दरबार आया हु, ना है कुछ पास में मेरे,दो आंसू भेट लाया हु, करो कृपा मेरी

अरी मैया कन्हैया की शिकायत क्या करू, नटखट की गगरिया फोड़ दी मेरी, ये आकर पास चुपके से तेरे कान्हा

सदा श्याम श्यामा पुकारा करेंगे नवल रूप निष् दिन निहारा करेगे, सदा श्याम श्यामा पुकारा करेंगे यमुना तट लता कुञ्ज

पल पल तेरी याद सताए लागे न कही जियरा तू ही तू दिखलाई देता याहा ये जाए नजरियाँ मोरे कान्हा