
श्याम नाम का मैं तो हो गया दीवाना
मैं दीवानी तेरे नाम की हु ना इस दुनिया के काम की हु श्याम हुए है अब मेरे और मैं

मैं दीवानी तेरे नाम की हु ना इस दुनिया के काम की हु श्याम हुए है अब मेरे और मैं

व्रजे प्रसिद्धं नवनीतचौरं गोपाङ्गनानां च दुकूलचौरम् अनेकजन्मार्जितपापचौरं चौराग्रगण्यं पुरुषं नमाम श्री राधिकाया हृदयस्य चौरं नवाम्बुदश्यामलकान्तिचौरम् पदाश्रितानां च समस्तचौरं चौराग्रगण्यं पुरुषं

तेरी ही कहानी, तेरी ही फ़साना, मेरा काम मोहन तेरे गीत गाना रंगीं बहरों से जी भर गया है जग

रंग चटक डाल गेयो चोली में सखी आग लगेगी होली में, बड़ा ढीठ है वो नन्द को लाला, तन को

कब लोगी खबरिया किशोरी, बीती जाये उमरियाँ मोरी, तेरे द्वारे बता कैसे आउ, बिन सहारे मैं चल भी ना पाउ,

मेरे घुंघरू बोले, हरे हरे, गोविन्द हरे, गोपाल हरे, जय जय प्रभु दीन दयाल हरे, जय जय प्रभु दीन दयाल

श्याम बिन कौन सुने मोरी बात कौन सुने मोरी बात रात रात भर अखियाँ आंसू जागु मैं दिन रात

दूल्हा बने रे नन्दलाल के रुक्मणि दुल्हन बनी, दुल्हन बानी दुल्हन बनी, दूल्हा बने रे नन्दलाल… रुक्मणि पहनी है सतरंगी

खुशबू है तू फूल हूँ मैं दोनों मिले तो बात बने रोज़ यही मांगू दुआ तेरा मेरा हर दम साथ

तेरी गलियों की जोगन मैं जबसे बनी, ज़िंदगी दिन वो दिन स्वर्ती रही, हुई करुणा की ऐसी नजर सांवरे के