
सांवरिया ने रास रचाया
सांवरिया ने रास रचाया ब्रिज सारा उसको देखन को आया, मोर के रूप में राधा नाचे गोपियाँ को भी साथ

सांवरिया ने रास रचाया ब्रिज सारा उसको देखन को आया, मोर के रूप में राधा नाचे गोपियाँ को भी साथ

सांवरिया चितचोर ने वाले प्रेम नगर के राजा रस के भरे अथात समंदर एक ही बूंद प्लाजा सांवरिया चितचोर ने

दिल दीवाना श्याम का मेरा चैन वैन सब खो गया, सब हो गया मेरे श्याम का दिल दीवाना श्याम का

कहा जाके बेठा है मेरे कन्हियाँ अब पार लगा दे तू मेरी ये नैया, कैसे बतायेगा ये तेरा दीवाना मैं

बरसाने में शोर मच गयो, होली खेले नन्द कुमार ब्रिज में रंग बरसे, बृषभानु दुलारी के द्वार ब्रिज में रंग

सुमिरन कर ले मेरे मना तेरी बीती उम्र हरिनाम बिना, पंक्षी पंख बिना हस्ती दंत बिना, नारी पुरष बिना, जैसे

आ जाओ मेरे सँवारे मंदिर को छोड़कर कब से बुला रहा हु घर बार छोड़ कर आ जाओ मेरे सँवारे

तेरी किरपा का भरोसा भारी राधा रानी, तू तो किरपा की है मूर्ति राधा रानी, तू तो किरपा ही किरपा

नाचे कृष्ण मुरारी, आनंद रस बरसे रे | नाचे दुनिया सारी, आनंद रस बरसे रे || नटखट नटखट हैं नंदनागर,

बेफिकर मैं रहता हूं जब से सब मेरी फ़िक्र वो रखता है, मैं नींद चैन की सोता हु मेरी खातिर