
भज गोविन्दम्
भज गोविन्दम् ‘आदि शंकराचार्य ‘ भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति

भज गोविन्दम् ‘आदि शंकराचार्य ‘ भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति

बनो गठड़ी वृन्दावन चलिये, वृन्दावन चलिये द्वारा उसदा मालिये, राधा लायी तुसी साड़ी लेलो श्याम लयी काली कमली,वृन्दावन चलिये बनो

तुझसा दयालु नही प्यारे प्यारे प्यारे, श्रुति कहे जगत पिता है तू ही प्यारे, बनो यशोदा मती सूत प्यारे प्यारे

मेरे सांवरे सलोने कन्हैया तेरा जलवा कहाँ पर नही है तेरा जलवा कहाँ पर नही है, तेरा जलवा कहाँ पर

कान्हा आ रे जिसे मैंने पाला पोसा उसी ने बिपदा में डाला बचा ले आके गोपाला, दूध छुड़ा कर नित

मुझे अपना दीवाना बना दे कन्हियाँ तेरा क्या बिगड़े, मुझे राधे राधे कहना सिखा दे कन्हिया तेरा क्या बिगड़े, मुझे

मोहन हमारे मधुबन में तुम आया न करो जादूभरी बांसुरी बजाया ना करो सूरत तुम्हारी देखकर सलोनी सांवरी सुनकर तुम्हारी

काम आएगा प्रभु का भजन, जिसने दिया है तुझे, प्यारा मानव जनम, करले उसका भजन, करले उसका भजन तेरी मुक्ति

ऐसी लगन तोसे लागी साँवरिया मन हुए बेकल नैन बावरिया, ग्वालो को संग में खेले कन्हाई हमरी क्या तकदीर बनाई

ओ राधे ओ राधे ओ राधे ओ राधे गोविन्द हरी ॐ गोपाल हरी ॐ राधे ओ राधे मोर मुकट धरी