
ऐ श्याम तुझे मैं खत लिखता
ऐ श्याम तुझे मैं खत लिखता पर पता मुझे मालूम नहीं, मैंने सूरज से पूछा चंदा से पूछा पूछा झिलमिल

ऐ श्याम तुझे मैं खत लिखता पर पता मुझे मालूम नहीं, मैंने सूरज से पूछा चंदा से पूछा पूछा झिलमिल

जब से तुम संग लो लगाई में बड़ी मस्ती में हूँ ॥ करके तुम संग आशनाई में बड़ी मस्ती में

पनघट पे मुझको छेड़े फोड़े वो मटकी मेरे, क्या बताऊ मैं उसकी करतूत तुझको मैया कन्हिया छेड़े है मुझको करके

राधे राधे, ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll, मैं तो वृन्दावन वस जाऊँ ll वृन्दावन वस जाऊँ, मैं तो वृन्दावन

मैंने संवारे जब तेरा नाम ले लिया, कान्हा तेरा नाम चड़े जैसे याम मैंने याम आठो याम पी लियां मैंने

धुन- बड़ी देर भई नँदलाला “चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे” ll मत पड़ दुनियाँ, के चक्क्र

पाछा जाता सांवरा, म्हारो जी दुख पावे रे, दोहा – आंसुड़ा ढलके म्हारा, हिवड़ो भर भर आवे, छोड़ थाने जावा

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई, मेहल बना दिए कुटिया म्हारी चमकादी मेरी नगरी सारी तने मेरी

सांवरे सरकार को तुम याद दिल से कीजिये॥ दिल हटा दुनिया से बंदे श्याम को दिल दीजिये हर तरफ मजबुरिया

राधा वेख दी है चढ़ के चोबारे श्याम मेरा क्यों नही आया मेरे श्याम का गोकुल में डेरा मेरी आँखों