
मृगला खेत गया सब खाई
अब मैं क्या करु मेरे भाई, मृगला खेत गया सब खाई क्या करु मेरे भाई अब मैं, खेत गया सब

अब मैं क्या करु मेरे भाई, मृगला खेत गया सब खाई क्या करु मेरे भाई अब मैं, खेत गया सब

मन ढ़ग मग डोले मैं कैसे भजन करू गा, मन में विश्वाश न होगा मैं कैसे नमन करू गा, मन

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना । अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ॥ दल बल

मोरपंख है सिर पे विराजे कानो में है कुण्डल साजे गले वैजयंती माला, श्याम है रंगीला मेरा श्याम है रंगीला,

कृष्ण कन्हैया गिरधर श्याम कितने सुंदर तेरे नाम, बिन तेरे दर्शन माने न मन, मुझको न आये आरम, कृष्ण कन्हैया

लाज रखो साई नाथ शिरडी वाले, भक्तो का देदो साथ शिरडी वाले, मेरे साई फकीरी में भी तुमने बादशाहत की,

सोहन माँ दा भवन सज्या भोली माँ नु गहरे भुलाया, किना करदे ओ प्यार माँ नु एह दसना पैना है

चारे पासे धूम मची है खुशिया दा वेला है, मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है, माँ दे प्यारे

अब तो सारे जहाँ पे यही शोर है मेरा सावरिया श्याम बड़ा चितचोर है हुई अखियाँ ये चार हुआ बुरा

मिन्दर थारो सोवणो धजा ऊङे असमान, दुखिया आवे द्वार पे मा धरे आपरो ध्यान, आसावरा धणियोणी मोटो देवरो ए माँ