
मैं भानु लली की दया चाहता हूँ
मैं भानु लली की दया चाहता हूँ अटारी की ताजी हवा चाहता हू भटकता रहा हूँ मैं दुनिया के

मैं भानु लली की दया चाहता हूँ अटारी की ताजी हवा चाहता हू भटकता रहा हूँ मैं दुनिया के

शाम सवेरे जपदे माला करदे जगराते दाती दे दीवाने दाती दे दीवाने दाती दे बैठी है दरबार लगा के आंबे

शान से कहते हम तो दादी वाले है, ये जीवन तो दादी तेरे हवाले है, हम तो तेरे अंचल में

तू क्या जाने ये जब जमाना दुखी होता है, तेरी तस्वीर से लिपट कर बहुत रोता है, कौन सुनता है

मेरे कान्हा जो आये पलट के, आज होली मैं खेलूंगी डट के, अपने तन पे गुलाल लगा गे, उनके पीछे

मेरा खाटू वाला श्याम धणी भक्तों का पालनहारी है भक्तों का पालनहारी है मेरा बाबा लखदातारी है मेरा खाटू वाला

तेरी रहमत का है ये असर संवारे, मुझे अब न है कोई फिकर संवारे, मैं जो आया तेरे दर और

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है । करता नहीं क्यों

तेरे रावा दी मिटी नु मैं चुम चुम कालजे लावा, इको इक रीज है दिल दी माँ , मैं तेथो

डारो डारो री रंग बनवारी पै, डारो डारो री। लालहिं लाल गुलाल गाल मलु, मलु अबीर लटकारी पै, डारो डारो