
चिंतापुरनी दे जाना दरबार
चिंतापुरनी दे जाना दरबार माँ नु मिलने दी आई है बहार, चिंतापुरनी दे जाना दरबार सोहन महीना देखो कैसा आ

चिंतापुरनी दे जाना दरबार माँ नु मिलने दी आई है बहार, चिंतापुरनी दे जाना दरबार सोहन महीना देखो कैसा आ

सांवरिया मिलने आजा रे, बांसुरियां मुझे सुना जा रे, क्यों राधे नीर बहाये रही, तेरी मुझको याद सताए रही, मेरी

झालर संख नगाडा भाजे रे झुंझनू के मंदिर में सती मात विराजे रे, सती मात विराजे रे महारी दादी विराजे

पुरे कुल जगत दे राजेया तेरे गल नागा दे हार तेरी जटा च गंगा वसदी तू नंदी दा सवार मेरी

आ शाम के संग में चलें प्यारे बरसाने में यूं कहें हम ब्रज की बातें अपनी आवाजों में कान्हा मिलना

मैंने सांवरा सलोना पसंद कर लिया, जी भर के देखा नजर बंद कर लिया, मैंने सांवरा सलोना पसंद कर लिया,

छू ले जो माँ की चौखट को तो जर्रा भी सितारा हो जाए, जहाँ जिक्र हो माँ का मंगल हो

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है, बचियाँ नु देन दिद्दार शेरवाली आई है , बड़े चीरा तो आज

सूरजगढ़ निशान के निचे जो भी आया है , खाटू वाले श्याम ने उसका भाग्ये जगाया है, ना जाने कितने

मिलने साँवरिया से जाऊँ, अपना सब श्रृंगार बनाऊँ, गज़रा बालों बीच सजाऊँ, बिंदी कुमकुम वाली लगाऊं, काजल नैनों में चटक