
गणपति समझा लो बिगड़ी फौजी तुम्हारी
गणपति समझा लो बिगड़ी फौजी तुम्हारी सारी रात ना सोहने देते कूदे मारे किलकारी गणपति समझा लो बिगड़ी फौजी तुम्हारी

गणपति समझा लो बिगड़ी फौजी तुम्हारी सारी रात ना सोहने देते कूदे मारे किलकारी गणपति समझा लो बिगड़ी फौजी तुम्हारी

यूँ ही नहीं पूजते है लोग ज़माने वाले, साई बाबा तो है बिगड़ी को बनाने वाले, यूँ ही नहीं पूजते…

तेरे अन्द्रो मैल न जावे नहोन्दा फिरे तीरथा ते, सच्चे दिलो न तू बाबे तू ध्यावे नहोन्दा फिरे तीरथा ते,

तुझे फरयाद इस दिल की सुनाई क्यों नही देती लबो से आह जो निकले दिखाई क्यों नही देती बरसती है

हरी का भजन करूँ हरी को नमन करूँ हरी को पुकारूँ सुबह शाम हरी के भजन बिन जीवन सूना कैसे

थे म्हारे घरा आया धन्यवाद दादीसा थारा टाबरिया ने दीज्यो आशीर्वाद दादीसा धन्य हुआ म्हे थारा दर्शन पाकर राखली थे

नई रीसा नई रीसा शेरावाली दे दरबार दिया पापिया नु भी वाजा मारे रेहमता माँ दे प्यार दिया नई रीसा

मोहन तुम्हारे प्यार ने जीना सीखा दिया हमको तुम्हारे प्यार ने इन्सां बना दिया रहते है जलवे आपके नज़रों में

मझदार फसी नैया बड़ी दूर किनारा है, एक तू ही आ के राख हारे का सहारा है संवारे एक तू

आये नवराते आये माँ के नवराते आये तेरे दरबार में माँ तेरे दीवाने आये जो भी देखो तेरा माँ दीवाना