
पर्वत पे आजा मेरी गौरा क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी
पर्वत पे आजा मेरी गौरा क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारी तुम्हें गंगा

पर्वत पे आजा मेरी गौरा क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी मैं कैसे आऊं मेरे भोले मेरे से प्यारी तुम्हें गंगा

श्याम हमारे दिल से पूछो , कितना तुमको याद किया, याद में तेरे हे मनमोहन, जीवन यु ही गुजार दिया,

शिवरात्रि त्यौहार आ गया शिव रात्रि त्यौहार, शिव की मंगल मेय भक्ति का आ गया शिवरात्रि त्यौहार, शिव का नाम

तेरे भवन से आई माँ इक चिठ्ठी प्यारी है, चिठ्ठी में लिखा बेटा आजा जो चाहिए तुझे आकर ले जा

तुझे अपने बाबा पे भरोसा जो होगा, जो कुछ भी होगा अछा ही होगा, तुझे अपने बाबा पे भरोसा जो

मैं ढूंढ चूका सारा जग पता न कही तेरा मिला. मैं ढूंढ ढूंढ कर हारा,पता न कही तेरा मिला, बिन

दर ते भगता रोनक लाई हर पासे मन मस्ती छाई, हर पासे मन मस्ती छाई गूंजे हर एक चोटी, माँ

याद आई याद आई याद आई याद आई, साईं की याद आई साईं की याद आई, रोते रोते सो गये

बाबा ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया सौ बार शुक्रिया तेरा सौ बार शुक्रिया हंड्रेड बार शुक्रिया तेरा मिलियन

इतना बता दो सांवरिया के गलती म्हारी होगी मैं भी जिद पे अड़ा हु बाबा म्हारी भी सुन नी होगी