
आया मैं आस लेकर सरकार कुछ न चाहु
आया मैं आस लेकर सरकार कुछ न चाहु, अखियां तरस रही है दीदार तेरा चाहु, काबिल नहीं मैं तेरे बाबा

आया मैं आस लेकर सरकार कुछ न चाहु, अखियां तरस रही है दीदार तेरा चाहु, काबिल नहीं मैं तेरे बाबा

दोहा: बेगी हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो | कौन से संकट मोर गरीब को जो तुम से

भक्तो की रक्शा करे गा यहाँ पर बस देवा तुमने है ठानी, जन्मे यहाँ पर मिटी यहाँ की भक्तो की

खाटू नरेश अहिलावती नंदन कर हूं प्रणाम तुम्हें शत शत वंदन श्याम श्री श्याम मेरे खाटू वाले श्याम सिमरहू श्याम

मेरी खुल गई पटक दे के अख नि, गली दे विचो कौन लंगेया, पौन्हारी उते पेंदा मेनू शक नि, गली

मेहंदीपुर में देख ले झुकती आकर ये दुनिया सारी, कटते हैं उनके संकट आते जो नर नारी महिमा का तेरी

असीं साह छड जावांगे, असीं साह छड जावांगे फेर वाजां मारोगे, असीं मुड़ नहीं आवांगे इस जिंदगी तो की लैना

भगत प्यारे दर्शन पाके करदे जन्म सुहेला, माँ मेरी अम्बे दे दर लगाया मेला, श्रदा दे नाल ज्योत जगा के

मेरा सारा जीवन दरबार के लिए, खाटू वाले श्याम सरकार के लिए, आप की शरण मुझे जबसे मिले, बिन पतवार

तेरी मेहर की नजर हो गई दीवानी पे, तू फिर रोया था सुन कर मेरी कहानी पे, तेरी मेहर की