
मोहब्बत
तर्ज – ओ फिरकी वाली ओ खाटुवाले, तु प्यार जता ले, मुझे अपना लें, मुझे तुमसे प्यार है, इजहार का

तर्ज – ओ फिरकी वाली ओ खाटुवाले, तु प्यार जता ले, मुझे अपना लें, मुझे तुमसे प्यार है, इजहार का

दुर्गा देवी दया नी दुखड़े हरती माता रानी जो आ गया शरण में उनकी रक्शा करे भवानी, दुर्गा देवी दया

मेरे सतगुरु तेरी नौकरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी, खुश नसीबी का जब गुल खिला तब कही जाके ये दर

दर दर भटकु माँ मेरी तू ही संबलना, तेरा सहारा माँ मेरी तू ही संभालना किसको कहु मैं अपना कहने

भगत के वश में है भगवान, भक्त बिना ये कुछ भी नहीं है, भक्त है इसकी शान, भगत मुरली वाले

तेरे दरबार की मईया दिवानी दुनिया सारी है, या जगमग ज्योत तेरी जलती मैया घनी लागे प्यारी है, मैया ऋ

मैया दिल मेरा खो गया इन पहाड़ों में तुम तो रहती हो ऊँचे पहाड़ों में जब तेरा बुलावा आता है

मोहे लागी लगन तेरे नाम की, जग छूटे तो छूटे, रहमत पाई मैंने तेरे नाम की जग छूटे तो छूटे,

एक दो तीन चार, श्याम धणी की जय जयकार । खाटू की कर लो तैयारी, बुला रहा है लखदातार ।

माँ मनसा देवी झोली मेरी आज भरदे, तेरे मंदिर मे आया हूँ बेड़ा पार करदे, सब जग को सुख देने