
देखो झूम रहा कैलाश सारे गणपत की बोल रहे जय जय
देखो झूम रहा कैलाश सारे गणपत की बोल रहे जय जय, सारा नाच रहा कैलाश सारे गणपत की बोल रहे

देखो झूम रहा कैलाश सारे गणपत की बोल रहे जय जय, सारा नाच रहा कैलाश सारे गणपत की बोल रहे

कैलाशपति आओ, अब देर लगाओ ना, सुन लो सुन लो हे जटाधारी, मेरी आस पुराओ ना, दीवाना दिल पागल, बन

भाजन दे रे भोले नाथ डमरू भाजन दे, कैलाश में बैठा डेरा जमा के, माँ पारवती भी साथ डमरू भाजन

सब भगता दिया रीजा पुगाइयाँ भोले ने, दर ते नच्दे भगत प्यारे मौजा लाइया भोले ने, सब नु वंड दा

जो भी आता शरण में स्वीकार करते है सब की अर्जी पे भोला विचार करते है, शिव से ही रखना

भोले नाथ चले गोरा रानी को बिहाणे, मस्ती में आज लगे डमरू बजाने, भोले नाथ ने खेल रचाया , नंदी

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला, तेरे नाम की मैं जपु रोज माला , अब तो मनो कामना है

मैंने सुना है डमरू बाज रहा मेरे भोले का, मुझे चढ़ गया चढ़ गया नशा भांग के गोले का, कैसे

शम्बू के विवाह का मजा लीजिये, शिव के दीदार का मजा लीजिये, सर्पो का हार पहने बस्मी लगी अंग में,

द्वार पे तेरे ए है हम तुम तो हो अशरण अशरण, शिव शंकर धान तोड़ो हे दया निधि खोली नयन,