
जागरण की रात मैया
जागरण की रात मैया जागरण में आओ, माँ जागरण में आओ आस लगाएं बैठे हैं माँ अब तो दरश दिखाओ

जागरण की रात मैया जागरण में आओ, माँ जागरण में आओ आस लगाएं बैठे हैं माँ अब तो दरश दिखाओ

वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर माँ के ही संकेत पे हो दिन रैन साँझ और भौर,

कालो की महाकाली भवानी रूप लिए विकराल काली महाकाली कलकते वाली माँ कालो की महाकाली भवानी रूप लिए विकराल मुंडो

दुःख की बदली जब जब मुझपर छा गई सिंह सवारी करके मैया आ गई वो आ गई आ गई मेरी

मेरी जय जगदम्बे माँ तुम्हारी जय बोलू, जय हो जगदम्बे माँ तुम्हारी जय बोलू हम सब की रखवाली तुम्हारी बोलू

जागु मैं तेरे जगरातो में वर्त रखु माँ नवरातो में फिर भी वो लकीर नही मिट ती जो खीच दी

आ गईआ आ गईआ साहणु भवना तो चिठिया आ गईआ पा गईआ प् गईआ साडे दिला विच ठण्ड देखो पा

रंग भरा है जी फूलो में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलो में, आई खुशबु बहारो में रंगों

मुझे दर पे बुला ले माँ मिल ने को तरस ता हु जीता हु न मरता हु मुझे दर पे

माँवां ठंडियाँ छाँवां आखन तत्तिया हवा न लगे ओ लाल तो सदके जावा माँवां ठंडियाँ छाँवां….. माँ हर जीवन दी