
मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी
मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी पौनावाली तेरी ज्योता तो बलिहारी नगर नगर अस्थान तुम्हारा हर था ज्योत न्यारी तेरी

मैं बलिहारी तेरी ज्योता तो बलिहारी पौनावाली तेरी ज्योता तो बलिहारी नगर नगर अस्थान तुम्हारा हर था ज्योत न्यारी तेरी

तर्ज – छू कर मेरे मन को किया आये मेरी माँ के पावन नवराते घर घर मे होंगे , मैया

माँ शेरोवाली जग से निराली सुनती है सबकी जो भी दर पे आये मैं भी दर पे तेरे आ गया

दिल का पपीहा बोले नाम दातिए होके मगन सुबह शाम दातिए तेरे गुण गाउन तुझको ध्याऊँ और दुरसरा ना कोई

हाथो में तलवार खडक ले निकल पढ़ी है काली, भर भर खपर लाहू पी रही माता खपर वाली जय हो

ज्योत जगदी ज्वाला माएँ तेरी ओह दुखिया दे दुःख खंड दी, अकबर राजा’ चल नंगे पैरी आ गया तेरे दर

( देख तेरे भक्तों में, माँ किस कदर अंधेर है, जल्द पर्दे से निकल, माँ करी क्यों देर है l

तेरे दर पे आये है फर्यादे लाये है, सुनती हो सभी की माँ ये सुन के आये है तेरे दर

असी उड़दे आसरे तेरे,माँ सानु रख चरणा दे नेड़े असी उड़दे आसरे तेरे॥ असी उड़दे आसरे तेरे……….. भवन तेरे माँ

माँ संतोषी दरबार मैया आ जाओ एक बार मैया आ जाओ मैया आ जाओ तेरी राह निहारु दिन रात मैया