
नच नच भगता ने पाउणी है धमाल
आज शिव रात्रि शिव दा विवहा भगता न चड़ेया रज रज चा, सोहनी लगदी बारात सोहने लगे भोले नाथ, सबना

आज शिव रात्रि शिव दा विवहा भगता न चड़ेया रज रज चा, सोहनी लगदी बारात सोहने लगे भोले नाथ, सबना

राम कहने से तर जाएगा, वरना घुट घुट के मर जाएगा । भक्ति भावो से देखेगा जब, बस वो ही

कोई शोंक न था खेलने का हम को खतरों से, पर क्या करे दिल खो गया,उन टेढ़ी नजरो में, उन

गजानन पूरे कर दो काज शरण में आये हम भी आज शिव गौरा के राज दुलारे देवों के सरताज सबसे

सारा जग ढूंढ लिया कोई तुमसा न देखा, मोहन तेरे जलवे में सारा ही जहान देखा, रोता आये जो यहाँ

दूरों दूरों श्रद्धा दे नाल पुजारी तेरे आ गया, पुजारी तेरे आ गये भिखारी तेरे आ गये, हथा विच लै

मोहे लागि लगन खाटू श्याम की, मेरे श्याम प्रभु के नाम की, खाटू वाले श्याम भगवान की, मोहे लागि लगन

साईं दर ते शीश झुकाया मैं तेरी चरनी फूल च्ड़ावा मैं, साईं बिगड़ी मेरी बना दे, मेरी दस लाख दी

अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥भावार्थ : हे भगवान श्रीकृष्ण! आपके होंठ

तर जायेगे तर जायगे जेहड़े नाम जपन गये तर जायेगे, तर जायेगे तर जायगे शनि नाम जपन गये तर जायेगे,