
शिव अदभुत रूप बनाए
शिव अदभुत रूप बनाए, जब ब्याह रचाने आए भुत बेताल थे, सब्ग में चंडाल थे, कैसी बारात सिव सजाए, जब

शिव अदभुत रूप बनाए, जब ब्याह रचाने आए भुत बेताल थे, सब्ग में चंडाल थे, कैसी बारात सिव सजाए, जब

सावन का है मस्त महीना मन मस्ती में डोले, काँवरिया हर हर बम बम बोले मस्ती में देखो सब झूम

मेरे भोले की महिमा जग से निराली है, जो भी दरबार गया लौटा नहीं खाली है, हम है बगिया के

शिर्डी वाले साईं तेरी महिमा अप्रम पार, तू नानक तू ही इशवर आल्ल्हा तु मेरा सरजन हार, मेरे शिरडी वाले

लक्ष्मी जैसी हमरी दुल्हनियां, दुल्हनियां बिन रहा जाये न, राहा जाये न राहा जाये न, बिरहा का दुखड़ा सहा जाये

फुला नु न तोड़ मालने, एहना फुला च श्री राम वसदे, श्री राम वसदे श्री राम वसदे, फुला नु न

किसने बजाई सखी बाँसुरिया किसने बजाई बांसुरियां, पहले सुर में मोहे राधिका झलकी प्रेम गगरियाँ, किसने बजाई सखी बाँसुरिया…. दूजे

दुनिया से मैं हारा हूँ, तक़दीर का मारा हूँ, जैसा भी हूँ अपना लो, मैं बालक तुम्हारा हूँ । पापों

तुम्हारी याद आती है बताओ क्या करे मोहन, सुबह और शाम आती है रात भर वो रुलाती है, चैन हम

आयु तेरी बीत रही है कुछ तो सोच विचार, जन्म ये मिले न बारम बार, आयु तेरी बीत रही है