
गोकुल विच खुशिया छाइयाँ
गोकुल विच खुशिया छाइयाँ आज नंद घर पुत जमेया, नर नरायन कमल नैन नन्द घर लगी आंदन दी झड़ी, हो

गोकुल विच खुशिया छाइयाँ आज नंद घर पुत जमेया, नर नरायन कमल नैन नन्द घर लगी आंदन दी झड़ी, हो

तकदीर बदल ती देखि है इंसान बदल ते देखे है, वो बदले रिश्ते नाते यार भगवान बदल ते देखे है,

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना, हमे दर्श दिखा जाओ दिखला के चली जाना तुम को मेरे गीतों

अकेली घेर लई मधुवन में, श्य़ाम तैने कैसी ठानी रे, श्य़ाम मोहे वृंदावन जानो लौट कर बरसाने आनो मेरी कर

आणो पड़सी सेठ सावरां,भक़्ता की अरदास हैअर्जी सुणकर आवगो तु , सगलां नै विश़्वास है जब जब कोई काम पड़

मेरे राम रघुनाथ तेरी जय होवे नित्य-प्रति गुण मैं तेरे गाउँ तेरे चरणों मे शीस निवाऊँ गद-गद हो कर तुम्हें

बग्गड़ नगरी प्यारी,जहां दादी का दरबार, दर्शन करले प्राणी,जीवन मिले ना बारम्बार | सूरज की किरणे तेरी ज्योति जगाये, चन्दा

बेटी तो वो चिड़िया जिसे इक दिन उड़ ही जाना है लेकर केवल दाना पानी गाती मधुर तराना है पंख

हरि बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल, मुकुंद माधव गोविन्द बोल, हरि बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल,

जोगन जोगन हां जोगन जोगन हां जोगन जोगन , लगा के बसम चंदन कपड़ा गिर्वा दारान, करके बन गई मैं